मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा रूप हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

 मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा रूप हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ: "ब्रह्म" का अर्थ है "तपस्या" और "चारिणी" का अर्थ है "जो तपस्या करती है"। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और संयम की देवी माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की कथा: मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनकी पत्नी बनेंगी। मां ब्रह्मचारिणी की विशेषताएं: - मां ब्रह्मचारिणी को शक्ति और संयम की देवी माना जाता है। - वे अपने भक्तों को तपस्या और संयम की शक्ति प्रदान करती हैं। - मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान और शक्ति प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन विशेष रूप से मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है और उन्हें फूल, फल और अन्य चीजें चढ़ाई जाती हैं।

भोजन सम्बन्धी कुछ नियम ...

भोजन सम्बन्धी कुछ नियम ...



१ - पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन
करे !

२. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है !

३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है !

४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए !

५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है !

६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग
की वृद्धि होती है !

७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन
नहीं करना चाहिए !

८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल ,
वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं करना चाहिए !

९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !

१०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के ,
उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त
हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए !

११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए
ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर
( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर ही घर
वालो को खिलाये !

१२. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ
किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !
भोजन सम्बन्धी कुछ नियम

१३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी
चाहिए ! 

१४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए !

१५. भोजन के समय मौन रहे !

१६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !
१७. रात्री में भरपेट न खाए !

१८. गृहस्थ को ३२ ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए !

१९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन ,अंत में कडुवा खाना चाहिए !

२०. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण
करे ! 

२१. थोडा खाने वाले को --आरोग्य ,आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और
सौंदर्य प्राप्त होता है !

२२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए !

२३. कुत्ते का छुवा ,रजस्वला स्त्री का परोसा , श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन ,अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण
परोसा गया भोजन कभी न करे !

२४. कंजूस का  , वेश्या के हाथ का , शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए !...

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